इस बार अंबुवासी महोत्सव में हिस्सा नहीं ले पाएंगे श्रद्धालु

In राज्य

22 से 26 जून तक कामाख्या धाम में आयोजित होगा महोत्सव, मंदिर जाने के सभी रास्ते रहेंगे बंद

गुवाहाटी, 17 जून । राजधानी के नीलाचल पहाड़ पर स्थित विश्व विख्यात शक्तिपीठ मां कामाख्या धाम में सबसे बड़ा उत्सव अंबुबासी महोत्सव का आयोजन आगामी 22 से 26 जून तक परंपरागत रूप से आयोजित किया जाएगा। अंबुवासी महोत्सव के इतिहास में यह पहली बार होगा कि जब कोई भी श्रद्धालु इसमें हिस्सा नहीं ले पाएंगे। 22 जून की सुबह 07 बजकर  53 मिनट 15 सेकंड पर प्रवृत्ति शुरू होगी और 25 जून की रात 8 बजकर 16 मिनट 55 सेकेंड पर अंबुवासी की निवृत्ति होगी।

उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण के कारण इस बार सिर्फ धर्मीक विधिविधान के साथ मोहोत्सव का पालन किया जाएगा। इस संदर्भ में बुधवार को देवालय की ओर से कामाख्या धाम में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया था।
लॉकडाउन की घोषणा के पूर्व गत 20 मार्च से ही कामाख्या मंदिर का द्वार श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया गया था। मां की नित्य पूजा मंदिर के विधि विधान के साथ प्रतिदिन होता है। मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए बंद है। मंदिर में श्रद्धालुओं आने की अनुमती नहीं है।

राज्य सरकार ने गत 08 जून से सभी मंदिर -मस्जिद समेत धार्मिक प्रतिष्ठानों को खोलने की अनुमति दे दी है। लेकिन,  असम तथा देश के विभिन्न राज्यों में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए कामाख्या मंदिर प्रबंधन ने आगामी 30 जून तक मंदिर को आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रखने का फैसला  लिया है।
मंदिर संचलाना समिति का कहना है कि कामाख्या मंदिर में देश-विदेश से श्रद्धालु माता रानी का दर्शन करने के लिए आते हैं। कोरोना के फैलने की आशंका के मद्देनजर मंदिर को बंद रखने का फैसला लिया गया है। 30 जून के बाद स्थिति को देखकर मंदिर को खोलने पर फैसला लिया जाएगा।

अंबुवासी के अवसर पर कामाख्या मंदिर व आसपास के इलाकों में, घरों में जहां बाहर से लोग आकर रहते हैं उसको बंद रखने का निर्णय लिया गया। इस बारे में पहले से ही लोगों को सूचित कर दिया गया हैं। कामाख्या के निचले इलाकों से लेकर मंदिर तक जाने वाले सभी रास्तों को श्रद्धालुओं के लिए बंद किया गया है। कोई भी तीर्थ यात्री, साधु-संत कामाख्या धाम तक जा नहीं आ सकता है। इसके अलावा कोई भी सामाजिक संगठन भी मंदिर तक कैंप या भंडारा नहीं लगा सकता है।

अंबुबासी मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु प्रति वर्ष मां का दर्शन करने के लिए आते थे। पर्यटन के क्षेत्र में भी यह उत्सव बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। प्रत्येक वर्ष अंबुबासी महोत्सव कामाख्या धाम में धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन, इस वर्ष सब बंध रखा गया है।

इस अवसर पर देवालय प्रबंधन का कहना है कि सोशल मीडिया द्वारा कभी-कभी लोग श्रद्धालुओं को गलत सूचना देते हैं। मंदिर के स्थायी पांडा और पुजारियों के अलावा किसी भी व्यक्ति को मां कामाख्या का प्रसाद व रक्त वस्त्र वितरण करने की अनुमति नहीं है। मंदिर प्रबंधन ने इस बारे में लोगों को सतर्क होने का आह्वान किया है।
प्रत्येक वर्ष असम की राजधानी गुवाहाटी के नीलाचल पहाड़ पर स्थित विश्व विख्यात शक्तिपीठ कामाख्या धाम में अंबुबासी मेला आयोजित किया जाता है। कामाख्या मंदिर 51 शक्तिपीठों में अन्यतम है। अम्बुवासी के दौरान मंदिर के गर्भगृह में पूजा अर्चना बंद रहता है। मान्यता है कि देवी इस समय राजस्वाला में रहती हैं। इस कारण इस समय मंदिर में पूजा-अर्चना नहीं होती है। साधना के लिए अंबुबासी का समय सिद्धि प्राप्ति का सबसे उत्तम माना जाता है। जिस कारण देश-विदेश से श्रद्धालु यहां इस समय साधना के लिए आते हैं। (हि.स.)

Mobile Sliding Menu

error: Content is protected !!