एनआरसी में नाम शामिल करने का आधार वर्ष 1951 होना चाहिए: शिलादित्य देव

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गुवाहाटी, 30 जुलाई, संवाद 365 : लंबे आंदोलन, राजनीतिक लड़ाई तथा न्यायालयी प्रक्रिया के बाद राज्यवासियों की अपेक्षाओं के तहत अंततः सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की दूसरी मसौदा सूची प्रकाशित हो गई। इसको लेकर राज्यवासियों में खुशी का माहौल देखा जा रहा है। सभी राजनीतिक पार्टियां काफी संभलकर एनआरसी को लेकर बयान दे रहीं हैं। केंद्र और राज्य सरकार इसको लेकर पूरी तरह से सतर्क है। एनआरसी प्रकाशन के अवसर पर भाजपा नेता व होजाई विधानसभा क्षेत्र के विधायक शिलादित्य देव ने कहा कि असमवासी चाहते थे कि लगभग एक करोड़ लोगों का एनआरसी से नाम काटा जाए। उन्होंने कहा कि एनआरसी में नाम शामिल करने का आधार वर्ष 1971 के बदले अगर 1951 कर दिया जाता तो लगभग एक करोड़ लोगों का नाम एनआरसी से कट जाता, जो हमारे और असमवासियों की लिए खुशी की बात होती। विधायक देव ने कहा कि इस बार एनआरसी में मेरा नाम आ गया है। उन्होंने कहा कि एनआरसी कागज-पत्रों का खेल है। अगर किसी ने कागज जमा कर दिया तो एनआरसी में उसका नाम आ गया, अगर कोई कागज जमा नहीं कि पाया तो एनआरसी में उसका नाम नहीं आया। अब भी असम के बहुत ऐसे स्थानीय बाशिंदे हैं, जिसका एनआरसी में नाम नहीं आया है।

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