गलवान घटना के बाद अब कोई भारतीय सैनिक लापता नहीं  

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– छह घंटे चली भारत और चीन के डिविजनल कमांडर की बैठक फिर रही बेनतीजा

– एलएसी के बाद अब एलओसी पर हाई अलर्ट, गलवान की आड़ में कर सकता है कोई बड़ी हरकत

नई दिल्ली, 19 जून । गलवान घाटी में 15 जून की रात चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प के बाद गुरुवार को पाकिस्तान की सीमा एललोसी पर हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। आशंका है कि लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर रहा पाकिस्तान गलवान घटना के बाद कोई बड़ी हरकत कर सकता है। गलवान की घटना के बाद गुरुवार को पहली बार एलएसी पर भारत और चीन के डिविजनल कमांडर फिर आमने-सामने बैठे लेकिन 6 घंटे तक चली यह बैठक भी बेनतीजा रही। भारतीय सेना ने देर शाम एक बयान में स्पष्ट किया कि इस घटना के बाद अब कोई भारतीय सैनिक लापता नहीं है।

गलवान वैली में हिंसक झड़प के बाद जम्मू-कश्मीर में गुरुवार को एलओसी पर आईबी को हाई अलर्ट जारी किया गया है। डीजीपी जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने आज केन्द्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की सुरक्षा-व्यवस्था की समीक्षा बैठक के बाद कहा कि पाकिस्तान हमारे इलाके में और आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के लिए लद्दाख गतिरोध का फायदा उठाने की कोशिश कर सकता है। इसी आड़ में कश्मीर घाटी और अन्य जगहों पर हिंसा को भी बढ़ावा देने की भी घटनाएं हो सकती हैं, इसीलिए भारत-पाकिस्तान की नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर अलर्ट जारी किया गया है।

गलवान की घटना के बाद गुरुवार को पहली बार भारतीय सेना की 3-डिवीजन के कमांडर मेजर जनरल अभिजीत बापट ने अपने चीनी समकक्ष के साथ बैठक की। उन्होंने 15-16 जून की रात को हुई झड़प के संबंध में चीनी अधिकारियों के सामने कई पहलुओं को उठाया। भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच यह सामान्य-स्तरीय वार्ता छह घंटे से अधिक समय के बाद खत्म हो गई। इस बैठक के बाद भारतीय सेना ने एक बयान में कहा कि 15 जून को गलवान घाटी में हिंसक झड़प में कर्नल समेत 20 जवानों की शहादत के अलावा सभी कर्मियों का हिसाब है और कोई भी जवान गायब नहीं है। दरअसल इस झडप के बाद कई सैनिकों के लापता होने की अपुष्ट खबरें आ रही थीं। (हि.स.)

सेना की ओर से दी गई अच्छी खबर यह है कि गलवान हिंसा में घायल हुए सैनिकों की हालत में काफी सुधार है और अब कोई भी गंभीर नहीं है। 18 सैनिक सेना के लेह अस्पताल में हैं, वे लगभग 15 दिनों में ड्यूटी पर जाने लायक हो जाएंगे। 58 सैनिक दूसरे अस्पतालों में भर्ती हैं जिन्हें एक सप्ताह के भीतर वापस ड्यूटी पर भेजा जा सकता है।

सेना की ओर से लद्दाख के दूरदराज के इलाकों में अपनी भेड़ों और बकरियों को चराने वाले चरवाहों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है। सेना और स्थानीय प्रशासन उनके रहने और खाने की व्यवस्था करेंगे। सेना ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में डेमचोक और पैंगोंग के पास के गांवों को खाली कर दिया है। नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है। आने वाले दिनों में कुछ और गांवों को खाली कराया जाएगा। (हि.स.) फोटो स्रोत गूगल

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